Women's Day Special Story: साहस और जिद का दूसरा नाम है स्त्री
8 मार्च अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर हम आपको ऐसी तो महिलाओं की कहानी से रूबरू करा रहे हैं। जिन्होंने अपनी जिंदगी को संघर्षों के साथ ही सबसे खास और बेहतर बनाने की जिद कर ली है।
स्त्री की क्या परिभाषा लिखी जाए। त्याग, समर्पण, जिद और समझौते का दूसरा नाम ही स्त्री है। जब वह अपनी पर आ जाए तो यमराज से लड़ जाए और जब जिद पर आ जाए तो पूरी दुनिया को तबाह करने का साहस भी रखती है। एक महिला होना आसान नहीं है। उसका किरदार निभा पाना हर किसी के बस की बात भी नहीं है। 8 मार्च अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर हम आपको ऐसी तो महिलाओं की कहानी से रूबरू करा रहे हैं। जिन्होंने अपनी जिंदगी को संघर्षों के साथ ही सबसे खास और बेहतर बनाने की जिद कर ली है।
एक अकेली महिला नाविक लड़ रही साहस से अपनी लड़ाई
नर्मदा नदी पर महिला नाविक हर किसी के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बनी हुई हैं। एक अकेली महिला नाविक जो अपनी जिद और जुनून से अपना सफर तय कर रही हैं। नीतू बर्मन कई सालों से नाव चलाकर अपनी जीविका चला रही हैं। नीतू का मानना है कि जब दिल में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तब कुछ भी मुश्किल नहीं होता। यहां पर वे लोगों को अपनी नाव में बैठाकर नर्मदा के सौंदर्य के दर्शन कराती हैं। इस काम को करने में जितनी मेहनत लगती है। अपनी मेहनत की कमाई के आगे कभी थकावट महसूस ही नहीं होती।
जिंदगी की चुनौती को मात देकर निरंतर बढ़ रहीं आगे
भवानी यादव जिसके दोनों हाथ नहीं हैं, लेकिन वो फिर भी हार मान कर घर नहीं बैठी। उसने अपने पैरों को ही हाथ मान लिया और अपने पैरों से सारे काम करने में माहिर हो गई है। एमटेक कर रही भवानी यादव अपने पैरों से लिखती हैं, पैरों से ही लैपटॉप, मोबाइल को ऑपरेट करती हैं। संजने, संवरने का काम भी अपने पैरों से ही करती है। उन्हें अपने पैरों से इस तरह काम करते हुए देखकर इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्त्री का दूसरा नाम जिद है। अपने इस सफर में सिर्फ भवानी ही संघर्ष नहीं कर रहीं हैं, बल्कि उनकी मां रजनी यादव भी इसमें उनका बड़ा सहारा बनी है। जो हर कदम पर अपनी बेटी का साथ दे रही हैं और उसे एक खास मुकाम पर देखने की उम्मीद लगाए बैठी हैं।